यह तय है की मंज़िलें मिलेंगी अवश्य

यह तय है की मंज़िलें मिलेंगी अवश्य.

आप को सिर्फ़ इतना पता करना होगा की आपके लिए कौन सी मंज़िल सबसे बेहतर है.

what do you want, law of attraction

पहले तो आप यह कहेंगे की बेहतर होने से क्या होगा. बेहतर होने से वो मंज़िल थोड़े मिलेगी.

trust your dreams

मैं यह कहना चाहूँगा की मंज़िलें सिर्फ़ इस लिए नहीं मिलती क्योंकि हमारा ध्यान और उर्जा उसपे केंद्रित नहीं है. आप केंद्रित करना भी चाहेंगे तो थोड़े समय बाद आप के लिए उस ‘बेहतर मंज़िल’ के मायने बदल जाएँगे.

तोड़ा सजग रहेंगे तो या बिल्कुल संभव है.. हम में से हर एक के लिए. अभी आपको खुश होना था की किसी बात पे आपका मूड कदाचित् कुंठित हो गया. हम मंज़िल पे ध्याना लगाने के बजाए अपनी उर्जा दुखी होने में लगाने लग जाते हैं.

यह किसी पागलपन से कम नहीं है पर कोई यह मानने के लिए आसानी से राज़ी नहीं होता.यह एक चुनौती से कम नहीं है. आपको करना सिर्फ़ इतना होगा की  उसके लिए एक को चुनना होगा. केवल एक. दो से काम नहीं चलेगा. दो चुनेंगे तो या प्रश्न रह जाएगा की आख़िरकार चाहिए क्या.इतना कर लिया तो आप अपने आप को मंज़िल के काफ़ी करीब पाएँगे.

choose one

अक्सर हम इस सोच में पद जाते हैं की दो चार लम्हों के बाद क्या होगा. हम इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं की अगली मज़िल कौन सी होगी. हम चिंता करते हैं की यदि हम एक मंज़िल पर पहुँचते हैं तो शायद कहीं हमें दूसरी कुछ वांछनीय वास्तु का त्याग तो नहीं करना पद जाए.

या कहिए आपके भीतर एक द्वंद हो रहा है कुछ विचारों का.. आप इन विचारों को अच्छा या बुरा कुछ भी समझें. जो जीतेगा वो आपके ध्यान का अधिकारी होगा. वो विचार अधिकारी होगा आपकी उस उर्जा और शक्ति का.


या यूँ कहिए जीता वही जिसने आपके ध्यान पे हुकूमत की. ध्यान रखीये की आपकी ध्यान शक्ति ऐसे विचारों को ना मिले जो आपको कतई पसंद ना हों. सोचें वही जो आपको पसंद हो. आपकी सोच आपकी मज़िल की अमानत है. यह तभी संभव है जब आप एक ‘सबसे बेहतर मंज़िल’ चुन लें या यूँ कहिए लक्ष्य निर्धारित कर लें.

ऐसा लक्ष्य जिसके सिवा आपको किस चीज़ की फिक्र नहीं. यह लक्ष्य सजीव हो सकता है यदि हम हमारा अधिकतम ध्यान इसपे केंद्रित है.


8 responses to this post.

  1. Posted by Gumnaam on August 27, 2010 at 3:32 am

    very beautiful and touching indeed….and 100% true!

    Reply

  2. Posted by meeti on August 27, 2010 at 8:13 am

    this is beautifully said n meaningly put in words
    it touches the inner
    even the photos attract oneself to read

    Reply

  3. meeti.. glad to see you again :)

    i was particularly selective about photographs .. Just thought that pictures can help in conveying ideas in a better way :)

    Reply

  4. Great Work… you ought to be participating in the Poet’s Rally- http://jingleyanqiu.wordpress.com/2010/08/25/thursday-poets-rally-week-27-august-26-sept-1-2010/

    Do check it.. It’s hosted by Jingle- http://jingleyanqiu.wordpress.com/

    All the Best

    Reply

  5. जाम जिसने उठा लिया है फ़ना, उसकी किस्मत में कामयाबी है….
    -उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान के सौजन्य से

    किसी एक लक्ष्य को लें, और उस लक्ष्य को पाने के लिए अपनी सारी उर्जा लगा दीजिये,
    अपने विचार और अपने सपने- सब उस लक्ष्य पे न्योछावर कर दीजिये;
    और देखिये की कैसे चमत्कार होता है, दुनिया की कोई ताक़त आपको उस लक्ष्य पर पहुँचने से नहीं रोक सकती.
    -स्वामी विवेकानंद के सौजन्य से
    सोचें वही जो आपको पसंद हो. आपकी सोच आपकी मज़िल की अमानत है. यह तभी संभव है जब आप एक ‘सबसे बेहतर मंज़िल’ चुन लें या यूँ कहिए लक्ष्य निर्धारित कर लें.
    -कमल ठाकुर के सौजन्य से

    अपनी उर्जा को किसी लक्ष्य पे केन्द्रित करने के लिए आपको चाहिए कि आप अपनी उर्जा को पहचानें और उस केंद्र को जहाँ आप अपनी उर्जा केन्द्रित करना चाहते हैं… बस ये ही करना सबके बस कि बात नहीं… हालाँकि सब कर सकते हैं, परन्तु अपनी अज्ञानता के अधीन हो कर आत्मसमर्पण कर देने वाले, अपनी क्षमता को कभी पहचान नहीं पाते.. और इस कारणवश हमेशा द्वन्द में और कुंठित रहते हैं…

    चलते रहिये भाई; मंजिल दूर नहीं… :)

    Reply

  6. खूब कहा है नुसरत साहब ने :)

    Reply

  7. Great..thanks for remindering me all this. You are right that often we get derailed from our targets and start walking on the path which we shouldn’t..Thanks Again!! Me and your brother Lalit enjoyed it alot!!!

    Reply

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