चले हैं राम लला के घर को बसाने
भवसागर के केवट को उसकी जगह दिखलाने
चले हैं कुछ भक्त कमर कस कर यूँ
जैसे रहीम, मुहम्मद और प्यारे बुल्लेशाह
राम के नहीं, राम से नहीं,
वो तो हैं जैसे बेगाने
जो ना झाँक सके खुद अपने अंदर
बढ़ चले उनके कदम,
जग-निर्माता को इंसाफ़ दिलाने
कहते रहे जय श्री राम -२,
फिर रावन तुल्य कर्म कर डाले
चले हैं कुछ रुध्राक्श्धारि,
बनकर नेता बड़े एक समाज के
जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम खुश होंगे,
हिंदुओं को जागीर बनाने वालों से
और मुस्लिम को प्रभु की सौतेली औलाद मान कर,
मंदिर- मस्चिद में भेद करने वालों को
जी भर के वरदान मिलेंगे!!
No matter what the freaking verdict is, Rama lives in our hearts and nowhere else!!
Posted by yogesh chauhan on November 27, 2010 at 6:29 pm
Possessiveness of unclaimed power due to majority of hindus in India is what, making groups like RSS, VHP forget their own principles and traditions which i assume they might have read in geeta aur ramayan
Posted by Kamal Thakur on November 30, 2010 at 5:26 am