प्रारब्ध वह तीर है जो कमान से निकल गया.

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प्रारब्ध वह तीर है जो कमान से निकल गया. चूँकि हमने आज तक छूटे हुए तीरों को और कहे हुए शब्दों को वापिस आते नहीं देखा तो यह भी अवश्य होगा कि कुछ समय में वर्तमान क्या रूप लेने वाला है, वह भी कुछ हद तक तय है!

यह बिल्कुल संभव है की पूरी तरह से अपने विचारों को निर्मल व साफ करने क बाद भी आपका सामना ऐसी घंटनाओं या लोगों से हो रहा है जो आपको अनायास ही दुखी कर देते हैं.

एक पत्थर को गोलाई में घुमा के फेंके तो उसका गति मार्ग निश्चित रूप से अनुमानित हो सकता है. एक पल के लिए भी आप उस गोलाई से निकल कर, स्वेच्छा पत्थर घुमाने लग जायें तो होगा यह कि गति मार्क ठीक आपके हिसाब से होगा. तब कोई ज्योतिषी यह ना कह पाएगा का की आपका भाग्य निश्चित है.

ज्योतिष् विज्ञान उस कला का नाम है – जो ऐसे गोलों का हिसाब लगाती है! ज्योतिष् विज्ञान है तो बहुत पुराना किंतु मैने आज तक रामायण या महाभारत जैसे महाकव्यों में लोंगों को इसका सहारा लेते नहीं देखा!

jyotish - kismat - destiny - fate- create - your own destiny

कुंडली में कुछ अच्छा लिखा है तो आवश्या मान लीजिए पर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि जो उल्टा-सीधा पंडित जी ने आपको बताया वह गणना के हिसाब से ठीक भी है, तो भी आप उसको बदलने की शक्ति रखते हैं. यदि हम अपनी चाल ही बदल डालें?  स्वयं ही गणना आरंभ कर दें?  फिर बड़े से बड़ा दोष आपके दृढ़ निश्चय के आगे ना टिक सकेगा!

यदि आप तत्पर हैं अपना भाग्य खुद लिखने क लिए, तो यह कदापि संभव नहीं की प्रारब्ध के तीर हमेशा ही आपकी अनुमति के बिना छूटते रहें. आज, कल, परसों या कम से कम कुछ दिनों में, आपके तरकश में केवल वही तीर होंगे जो आपके दिशा निर्देश पे चलते हों.

2 responses to this post.

  1. Posted by puneet kumar on December 1, 2010 at 10:23 am

    wahhhh….. padhte hi yahi nikla muh se

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